December 8, 2021

अल्मोड़ा: आजादी का अमृत महोत्सव के तहत वनस्पति विज्ञान विभाग में हिमालय दिवस ऑनलाइन निबंध प्रतियोगिता में निबंध वाचन में उभरकर आया पर्यावरण चिंतन

 2,119 total views,  2 views today

भारत की आजादी का अमृत महोत्सव-2021 के तहत  वनस्पति विज्ञान विभाग, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा और माउंटेन इकोलॉजिकल सोसायटी, उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में ‘हिमालयी क्षेत्र की समस्याएं एवं निदान विषय पर ऑनलाइन निबंध प्रतियोगिता का आयोजन हुआ और हिमालय दिवस  मनाया गया।

200 से अधिक स्थानों पर हिमालय दिवस का आयोजन किया जा रहा है

इस प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम के संरक्षक प्रो0 नरेंद्र सिंह भंडारी, प्रतियोगिता के मुख्य निर्णायक प्रो0 जे0 एस0 रावत (चेयर, डी0एस0टी0 भारत सरकार एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, भूगोल विभाग), कार्यक्रम के संयोजक और वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ0 बलवंत कुमार, प्रतियोगिता के निर्णायक प्रो0 उमा मेलकानिया (पूर्व अधिष्ठाता विज्ञान (जी0बी0पंत, कृषि विश्वविद्यालय, पंतनगर), डॉ0 धनी आर्या (वनस्पति विज्ञान विभाग), कार्यक्रम सचिव डॉ0 मंजूलता उपाध्याय एवं प्रतियोगिता के निर्णायक डॉ0 ललित चंद्र जोशी (पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग), डॉ0 मनीष त्रिपाठी सहित वनस्पति विज्ञान विभाग के शिक्षक, छात्र-छात्राएं और विभागीय कर्मी मौजूद रहे।
ऑनलाइन निबंध प्रतियोगिता के उद्घाटन अवसर पर कार्यक्रम संयोजक डॉ0 बलवंत कुमार ने कार्यक्रम के संबंध में विस्तार से रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि पूरे देश में 200 से अधिक स्थानों पर हिमालय दिवस का आयोजन किया जा रहा है। देश में पर्यावरण चिंता को लेकर पर्यावरण चिंतकों द्वारा कार्य किया जा रहा है।

2011 से हिमालय बचाओ अभियान का शुभारंभ किया गया

इसी के तहत मुख्य कार्यक्रम जे0 एन0 यू0, नई दिल्ली में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रियों एवं अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित किया जा रहा है। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग ने भी पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता के साथ अपनी जिम्मेदारी को समझा है। डॉ0 बलवंत ने कहा कि वर्ष 2011 से हिमालय बचाओ अभियान का शुभारंभ किया गया, जो अब हिमालय दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा पर्यावरण के संरक्षण, हिमालय के महत्व को समझाने के लिए हमेशा से ही प्राथमिकता के साथ मनाया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि 11वें वर्ष में 200 से अधिक स्थानों पर यह कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। भविष्य में भी हम प्रकृति के संरक्षण के लिए कार्य करते रहेंगे। उन्होंने हिमालय दिवस की बधाईयां दी और अतिथियों का स्वागत किया।

हिमालय भारत का मस्तक है

इस अवसर पर कार्यक्रम के संरक्षक और मुख्य अतिथि रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 नरेंद्र सिंह भंडारी ने वनस्पति विज्ञान के विभागाध्यक्ष और विभाग के सभी शिक्षकों की  अकादमिक गतिविधियों को प्रमुखता के साथ संचालित करने पर सराहना की। कुलपति प्रो0 भंडारी ने हिमालय को लेकर कहा कि हम हिमालय के हैं, अगर इस भाव के साथ हिमालय से जुड़ेंगे तो हम अपने को सुरक्षित महसूस कर पाएंगे। हम उस पर अपना आधिपत्य न समझें। हिमालय भारत का मस्तक है। यह हिमालय, महज हिमालय ही नहीं बल्कि यह संस्कृतियों का भंडार है, यह हमारी लाइफलाइन है और हमें इसके संरक्षण के लिए आगे आना होगा। उन्होंने कहा हिमालय में पुरातन धारा छुपी हुई है। हम हिमालय को प्रणाम करते हैं। प्रो0 भंडारी ने कहा कि हम वृहद रूप में हिमालय दिवस को भविष्य में आयोजित करेंगे। उन्होंने जिगोबाइल लोबा औषधीय पौधों को लेकर उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का वनस्पति विज्ञान विभाग इस औषधीय पौधों को परिसर में लगाने के लिए कार्य करे। उन्होंने कहा कि जिगोबाइल लोबा में विशिष्ट गुण है। हिमालय दिवस मनाने के पीछे के भाव को प्रस्तुत करते हुए उन्हेंने कहा कि हम इन दिवसों के माध्यम से संबंधित विषयों पर भावात्मक रूप से जुड़ते हैं। हिमालय दिवस के अवसर पर कुलपति प्रो0 भंडारी ने विभाग के शिक्षकों, अतिथियों एवं छात्रों को बधाईयां दी। साथ ही हिमालय को बचाने की प्रतिज्ञा दिलवाई।
प्रतियोगिता के मुख्य निर्णायक के रूप में चेयर, डी0एस0टी0 भारत सरकार एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, भूगोल विभाग के विद्वान प्रो0 जे0 एस0 रावत ने अपने संबोधन में सबसे पहले सभी को हिमालय दिवस की बधाईयां दी। साथ ही उन्होंने विश्व के भू-भाग, पर्वत शिखरों, जल संरक्षण, पर्यावरण असंतुलन, जैव विविधता, भूमिगत जल संवर्धन, नदियों के पुनर्जनन आदि कई बिंदुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विश्व परिप्रेक्ष्य में आधी से अधिक जनसंख्या पर्वतीय क्षेत्रों में रहते हैं। हिमालय के संबंध में कहा कि हिमालय युवा पर्वत है। इस युवा पर्वत के विभिन्न स्थितियों पर हमें लगातार नजर रखनी होगी। उन्होंने कहा कि हिमालयी भू स्वरूप निर्जीव नहीं है, बल्कि इसका भू स्वरूप सजीव है। इसमें व्यवस्था क्रमबद्ध है। यदि हमने इसको नहीं समझा तो हम इस हिमालय को नहीं समझ पाएंगे। चिंतक प्रो0 रावत ने आगे कहा कि हिमालय भूकंप की दृष्टि से बहुत संवेदनशील है। हमें हिमालय में हो रही अनियंत्रित गतिविधियों पर नियंत्रण साधना होगा और प्राकृतिक चक्र को बनाया रखना होगा। हमारे कई ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं और नदियां सूख रही हैं जो चिंता का विषय है। आज कई नदियां सूखने के कगार पर पहुंच रही हैं। हमें हिमालय और हिमालय की जीवनदायिनी नदियों के संरक्षण/संवर्धन के लिए आगे आना होगा। हमें नदियों के संवर्धन के लिए भूमिगत जल को बढ़ाना होगा, वर्षा जल का संग्रहण करना होगा, वनारोपण करना होगा। हमें ग्लेशियरों के पिघलने को बहुत गंभीरता के साथ देखना होगा। अन्यथा जीवन संकट में पड़ जाएगा। उन्होंने भूमिगत जल संवर्धन के लिए चाल, खाल बनाने की बात कही। और कहा कि हमें अब वास्तविक भूमि में उतर कर नदियों के संरक्षण के लिए आगे आने की जरूरत है।

हिमालयी क्षेत्र में नियोजित विकास कर हिमालय को बचा सकते हैं

निर्णायक डॉ0 ललित चंद्र जोशी ने कहा कि हम हिमालयी क्षेत्र में नियोजित विकास कर हिमालय को बचा सकते हैं। हमें स्थानीय जनता को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाने, योजनाओं का क्रियान्वयन करने, विकास करने की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 नरेंद्र सिंह भंडारी द्वारा चलाए गए मीत पीपल अभियान एवं प्रो0 जीवन सिंह रावत द्वारा कोसी संवर्धन को लेकर संचालित अभियानों को हिमालय के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इन दोनों चिंतकों के आइडिया को सरकारों द्वारा हर प्रदेश में लागू करना चाहिए।
निर्णायक प्रो0 उमा मेलकानिया (पूर्व अधिष्ठाता, विज्ञान, जी0बी0पंत, कृषि विश्वविद्यालय, पंतनगर) ने वनस्पति विज्ञान विभाग के हिमालय संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमालय के निरंतर हो रहे क्षरण पर हम सभी को चिंतन करना होगा। आज हिमालय में ग्लेशियरों पर प्रभाव पड़ा है। यहां तक कि जनजीवन, समाज-संस्कृति, आर्थिकी पर भी विपरीत प्रभाव पड़े हैं। हमें हिमालय की जैव विविधता को बनाए रखने के लिए शपथ लेनी होगी। उन्होंने कहा जो इस प्रतियोगिता में जिन निबंधों का वाचन किया गया है, उनको कसौटी पर कसकर सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया  जाना चाहिए। उन्होंने सभी प्रतिभागियों की सराहना की और उन्होंने प्रतियोगिता में अव्वल आए प्रतिभागियों की घोषणा की।
सभी अतिथियों का आभार जताया

वनस्पति विज्ञान विभाग के शिक्षक डॉ0 धनी आर्या ने अपने संबोधन में कहा कि वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा हिमालय को बचाने के लिए जमीन धरातल पर कार्य किया जा रहा है। विभाग के कार्य अब पहचान बन रहे हैं। साथ ही विश्वविद्यालय के कुशल नेतृत्व करने वाले कुलपति प्रो0 नरेंद्र सिंह भंडारी ने हमें प्रोत्साहित किया है। उन्होंने सभी अतिथियों का आभार जताया।

10 प्रतिभागियों ने अपने निबंधों का वाचन किया

इस निबंध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रिया गुप्ता, द्वितीय पूजा मेहता, तृतीय पुरस्कार हिमानी दुर्गापाल, हिमानी तिवारी, ममता कनवाल, पूजा जोशी रहे। सांत्वना पुरस्कार हितेश पांडे, ज्योति जोशी, लक्ष्मण गिरी गोस्वामी, मीनाक्षी कनवाल रहे।
‘हिमालयी क्षेत्र की समस्याएं एवं निदान विषय पर ऑनलाइन निबंध प्रतियोगिता में 10 प्रतिभागियों ने अपने निबंधों का वाचन किया। जिनमें हिमानी दुर्गापाल, हिमानी तिवारी, हितेश पांडे, ज्योति जोशी, लक्ष्मण गिरी गोस्वामी, ममता कनवाल, मीनाक्षी कनवाल, पूजा जोशी, पूजा मेहता, रिया गुप्ता थे।
इस कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम सचिव डॉ0 मंजूलता उपाध्याय ने किया। 

यह लोग रहे मौजूद

इस कार्यक्रम में डॉ0 सुभाष चंद्र, डॉ0 मनीष त्रिपाठी, प्रमोद भट्ट, नंदा बल्लभ सनवाल, पप्पू बाल्मिकी आदि ने सहयोग दिया तथा प्रतियोगिता में नेहा बिष्ट, राधा, ज्योति, पूजा आदि  सहित दर्जनों शिक्षक, छात्र-छात्राएं, शोधार्थी एवं विभागीय सदस्य मौजूद रहे