January 30, 2023

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अल्मोड़ा: सांसद अजय टम्टा द्वारा पर्यावरण संस्थान कटारमल का किया गया भ्रमण

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अल्मोड़ा पिथौरागढ के सांसद अजय टम्टा  द्वारा पर्यावरण संस्थान कटारमल का भ्रमण किया गया एवं संस्थान के निदेशक प्रो० सुनील नौटियाल से संस्थान द्वारा किये जा रहे विभिन्न शोध एवं विकास कार्यों पर और गहन अध्ययन किये जाने पर जोर दिया ताकि शोध परिणाम अधिक समाजोपयोगी हो सके।

पर्यावरणीय समस्याओं पर शोध हेतु महत्त्वपूर्ण सुझाव दिये

उन्होंने भारत वर्ष के विभिन्न शोध संस्थानों, विश्वविद्यालयों एवं औद्योगिक संस्थानों एवं विश्व के कुछ देशों के अपने अनुभवों पर आधारित पर्यावरणीय समस्याओं पर शोध हेतु महत्त्वपूर्ण सुझाव दिये जिनके द्वारा हिमालयी क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक को सुदृढ़ किया जा सके।

4 विषयों पर कार्य करने की सलाह दी

उन्होंने मुख्यतः 4 विषयों पर कार्य करने की सलाह दी जिसमें

★चीड़ की पत्ती (पिरूल) द्वारा वनाग्नि की समस्या के संभावित हल हेतु सांसद अजय टम्टा ने कहा कि अगर चीड़ की पत्तियों को किसी तरह से संघनित (कम्प्रेस कर सके जिससे कि इसे ट्रांसपोर्ट कर गैसीफायर से बिजली बनाने, फैक्ट्री आदि हेतु ईंधन में इसका उपयोग सरल हो जायेगा।

★ कीड़ा जड़ी (यार्सागुम्बा) पर उन्होंने विस्तृत शोध करने की आवश्यकता जताई कि किस तरह से इस जड़ी बूटी के प्राकृतिक परिवेश में उत्पादन बढ़ाया जाय एवं इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जाय। उन्होंने इसके रासायनिक गुणों के अध्ययन करने का सुझाव दिया ।

★उन्होंने लम्बे रेसे वाले पौधों (यथा भीमल, अलसी, रेमी) का उदाहरण देकर कहा कि इनके रेसे से सेल्यूलोज का लिग्निन से अलग करने की विधि पर शोध करने की आवश्यकता है जिससे इन वनस्पतियों को कृषक उगा सके एवं कच्चे माल का कपड़ा उद्योग हेतु विपणन कर सके।

★ औषधीय गुणों वाले पौधों का रोपण तथा इनके संरक्षण पर उन्होंने उत्तराखण्ड में बहुतायत से उगने वाले जंगली भांग से औषधीय तेल के रासायनिक गुणों का और अध्ययन करने की आवश्यकता जताई।

कीड़ा जडी पर अध्ययन आधारित एक दस्तावेज बनाने को संस्थान के सभी क्षेत्रीय केन्द्रों एवं मुख्यालय की टीम का गठन

उपरोक्त बिन्दुओं पर संस्थान के निदेशक महोदय ने यह अवगत कराया कि कीड़ा जडी पर अध्ययन आधारित एक दस्तावेज बनाने को संस्थान के सभी क्षेत्रीय केन्द्रों एवं मुख्यालय की टीम गठित कर ली है एवं आगामी कुछ समय में यह दस्तावेज तैयार होगा। उन्होने संसद महोदय को अन्य शोध बिन्दुओं पर भी संस्थान में किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

पिरुल से निर्मित निर्धूम बायोब्रिकेट के ईंधन हेतु अधिक प्रचार प्रसार की आवश्यकता बताई

संस्थान के वैज्ञानिक डा० आई०डी० भट्ट द्वारा भाग (हॅम्प) पर किये जा रहे उनके एन.बी.आर.आई.लखनऊ के साथ सम्मिलित शोधकार्य के विषय में टी०एल०सी० की ज्यादा मात्रा (0 03% ) वाली किरम को विकसित करने की आवश्यकता के बारे में बताया गया।  इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक डा० जी०सी०एस० नेगी ने चीड़ की पत्तियों से बनाये जा रहे विभिन्न उत्पादों की जानकारी दी एवं पिरुल से निर्मित निर्धूम बायोब्रिकेट के ईंधन हेतु अधिक प्रचार प्रसार की आवश्यकता बताई। इस अवसर पर डा० आशीष पाण्डे एवं सांसद महोदय के वैयक्तिक सहायक जोशी जी भी उपस्थित रहे।