देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। भारत में विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ‘महिला आरक्षण अधिनियम 2023’ (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) लागू किया गया था। जो वोटिंग के दौरान गिर गया।
महिला आरक्षण बिल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन केंद्र सरकार को उस वक्त बड़ा विधायी झटका लगा, जब लोकसभा में महत्वपूर्ण ‘संविधान संशोधन बिल’ वोटिंग के दौरान गिर गया। सत्ता पक्ष सदन में इस ऐतिहासिक संशोधन के लिए आवश्यक ‘दो-तिहाई बहुमत’ का आंकड़ा नहीं जुटा सका। रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे पहले, बिल पर हुई तीखी चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार का रुख स्पष्ट किया। गृह मंत्री के संबोधन के तुरंत बाद कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बिल को विचार और पारित करने के लिए सदन के पटल पर रखा। सदन में मौजूद सदस्यों के बीच इस पर मतविभाजन कराया गया।
क्यों गिरा बिल?
रिपोर्ट्स के मुताबिक संविधान संशोधन की प्रक्रिया के अनुसार, ऐसे बिलों को पारित करने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। वोटिंग के दौरान सरकार इस जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई, जिसके चलते स्पीकर ने बिल के गिरने की घोषणा की।
जानें क्या है ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’
सितंबर 2023 में संसद के विशेष सत्र के दौरान पारित इस ऐतिहासिक विधेयक का लक्ष्य लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित करना है। वर्तमान अधिसूचना ने इस कानून को कानूनी रूप से अस्तित्व में ला दिया है, जो भविष्य के चुनावों में भारतीय राजनीति की तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है।