आज 26 जून 2026 है। आज रामलक्ष्मण द्वादशी है। राम लक्ष्मण द्वादशी (जिसे चंपक द्वादशी या राघव द्वादशी भी कहा जाता है) ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाती है। यह तिथि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और उनके अनुज लक्ष्मण जी के प्रगाढ़ प्रेम और भाईचारे को समर्पित है। 26 जून 2026 (शुक्रवार) को मनाई जाने वाली राम-लक्ष्मण द्वादशी (चंपक द्वादशी) भगवान विष्णु के अवतारों और आदर्श भ्रातृत्व को समर्पित है।
खास है महत्व
इस पावन दिन को ‘चंपक द्वादशी’ भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु, श्री राम या श्री कृष्ण का चंपा के फूलों से श्रृंगार और पूजन करने का विधान है। यह दिन भगवान श्री राम, शेषनाग के अवतार लक्ष्मण जी और माता सीता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन पूरी श्रद्धा से श्री राम और लक्ष्मण जी की पूजा करता है, उसके जीवन में लंबे समय से अटके या बाधित कार्य बिना किसी विघ्न के पूरे हो जाते हैं। यह दिन राम-लक्ष्मण के आदर्श भाईचारे को समर्पित है, इसलिए इस दिन पूजा करने से परिवार में सुख-शांति आती है और भाइयों के बीच आपसी प्रेम और सौहार्द मजबूत होता है।
जानें शुभ मुहूर्त
द्वादशी तिथि प्रारंभ: 25 जून 2026 को रात 08:09 PM बजे
द्वादशी तिथि समाप्त: 26 जून 2026 को रात 10:23 PM बजे
द्वादशी पारण समय (अगले दिन): 27 जून 2026 की सुबह 05:25 AM से 08:13 AM तक (चूंकि तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी, इसलिए सुबह जल्दी पारण करना श्रेष्ठ है)
जानें पूजन विधि
द्वादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान के समक्ष हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर में या पूर्व दिशा में एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण जी और माता सीता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। साथ ही श्रीकृष्ण की मूर्ति भी रखें। भगवान को रोली, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, फूल और घी का दीपक अर्पित करें। इस दिन भगवान को चंपा के सुगंधित फूल या कोई भी सफेद अथवा पीले रंग के फूल अवश्य चढ़ाएं। पूजा के दौरान रामायण की चौपाइयों का पाठ करें और प्रभु श्रीराम के मंत्रों का जाप करें। अंत में घी के दीपक या कपूर से आरती करें।