उत्तराखंड: बदरीनाथ धाम के भव्य सिंहद्वार की बदलेगी सूरत: ASI, PMO के निर्देश के बाद शुरू हुआ संरक्षण कार्य, पारंपरिक स्वरूप में ही होगी मरम्मत

उत्तराखंड: (चमोली) विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम की पहचान और उसके मुख्य आकर्षण ‘सिंहद्वार’ के संरक्षण को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है।

जर्जर हो चुकी थी छत

इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम ने सिंहद्वार की क्षतिग्रस्त और जर्जर हो चुकी छत का मरम्मत कार्य आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) के सीधे निर्देश के बाद शुरू हुए इस काम से सिंहद्वार की ऐतिहासिक और पारंपरिक भव्यता को सुरक्षित रखा जा सकेगा। दरअसल देश-दुनिया में बदरीनाथ धाम की पहचान सिंहद्वार से ही होती है, जहां से श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश करते हैं। इसके ऊपर ‘यम दीप’ जलाने की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा भी है।

लिखा था पत्र

रिपोर्ट्स के मुताबिक ASI की टीम द्वारा किए गए विस्तृत निरीक्षण और अध्ययन में सिंहद्वार के ऊपरी हिस्से का ढांचा (जो लकड़ी और टिन से बना है) पूरी तरह जर्जर हो चुका था और उसकी लकड़ियां सड़ चुकी थीं। छत जर्जर होने के कारण बारिश का पानी रिसकर मंदिर के बेसमेंट (भूतल) तक पहुंच रहा था। भूतल में लगातार नमी रहने के कारण पत्थरों के बीच की सामग्री (जॉइंट्स) को नुकसान पहुंच रहा था, जिससे भूधंसाव के कयास भी लगाए जाने लगे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने वर्ष 2023-24 में केंद्र और राज्य सरकार सहित ASI को इसके वैज्ञानिक अध्ययन के लिए पत्र लिखा था। इसके बाद दिल्ली से ASI के अतिरिक्त महानिदेशक के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय टीम बदरीनाथ पहुंची थी।‌ दीवारों के पत्थरों के बीच आए गैप और हल्के मूवमेंट की सटीक जांच के लिए टीम ने दरारों के बीच नट-बोल्ट की मदद से ग्लास स्लिप (शीशे की लंबी शीट) लगाई थी। इसी अध्ययन और बदरीनाथ महायोजना की रिपोर्ट के आधार पर अब यह कार्य किया जा रहा है।