गूगल पर जिंदगी, एक क्लिक पर खुली जा रही, डॉ. ललित जोशी योगी की स्वरचित कविता
जिंदगी धागे की तरह FB, इंस्टा पर खुलती जा रही है स्टेटस पर एक जिंदगी हारती हुई मुझे दिखाई दे रही। गर्भनाल से दूर हुए दुधमुँहे शिशु भी पोस्ट हो रहे हैं, बैड रूम के भीतर की जिंदगी भी इस पे दिखाई दे रही।करवाचौथ का चांद, दिख रही हैं यहां…