पहाड़ी कविता: परदेस में बसा उत्तराखंड—गौरव पांडे की कविता में जीवंत हुई पहाड़ की यादें
घुघुती, काफल और भट्ट के डुबुरक: शब्दों में उतरा पहाड़ का लोकजीवन गौरव पांडे की इस कविता में उत्तराखंड की माटी की खुशबू, वहां के रीति-रिवाज, खान-पान और संस्कृति की सोंधी महक साफ झलकती है। आधुनिकता की दौड़ में भले ही लोग अपने घरों और गांवों से दूर शहरों की…