SC/ST कानून के तहत दर्ज कोई अपराध पीड़ित की जाति देखकर नहीं किया गया, तो केस निरस्त कर सकती हैं अदालतें- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि अगर किसी अदालत को लगता है कि एससी/एसटी अधिनियम के तहत दर्ज कोई अपराध मुख्य रूप से निजी या दीवानी का मामला है या पीड़ित की जाति देखकर नहीं किया गया है तो वह मामले की सुनवाई निरस्त करने की अपनी शक्ति का…